योग एवं आयुर्वेद विश्व को भारत की अमूल्य देन

जयपुर  21 जून 2019 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर बीकानेर हाउस परिसर आयोजित कार्यक्रम मे आयुर्वेद चिकित्साधिकारी प्रभारी डॉ. मनजीत कौर ने अधिकारियों कर्मचारियों को योग से  सम्बंधित विभिन्न आसन करवाए। उन्होेंने बताया की वेदों को विश्व का सबसे प्राचीनतम ग्रंथ माना जाता है, और आयुर्वेद को सबसे प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति इसलिए योग एवं आयुर्वेद विश्व को भारत की अमूल्य देन है।
उन्होंने बताया की योग का शाब्दिक अर्थ होता है संयोजन(जोड़ना), मिलान, संतुलन और एकत्व इत्यादि। योग के फायदे बताते हुए उन्होंने बताया कि रोगों के दो प्रमुख कारण है (1)शारीरिक और (2) मानसिक दोनों का आपस में गहरा संवंध है। शारीरिक रोग कालांतर में मानसिक रोगों में, और मानसिक रोग ,शारीरिक रोगों में प्रायशः परिवर्तित हो जाते हैं। जब तक आत्मा, इंद्रियाँ और मन प्रसन्न न हो ,तब तक किसी को स्वस्थ नहीं कहा जा सकता। जिस प्रकार शारीरिक रोग शरीर को कमज़ोर बनाते है , उसी प्रकार मानसिक रोग मानसिक संतुलन को कमज़ोर कर देते हैं।
डॉ. मनजीत बताती हैं कि शारीरिक रोगों की चिकित्सा करना , मानसिक रोगों की चिकित्सा करने से ज़्यादा सरल है, क्योंकि शारीरिक रोगों को हम दर्शन, स्पर्शन और प्रश्न के माध्यम से जानकर चिकित्सा करते है। परंतु मानसिक रोग जो मुख्यतः काम, क्रोध, राग, द्वेष, भय , इत्यादि से उत्पन्न होते है, उनको रोगी चिकित्सक को पूर्णतया नहीं बताता। कुछ न कुछ अवश्य छुपाता है , इस तरह की प्रवृत्ति रोग निदान में अवश्य बाधा उत्पन्न करती है। अतः शारीरिक रोगों को दूर करने में जिस प्रकार आयुर्वेद श्रेष्ठ है , उसी प्रकार मानसिक रोगों के लिए योग श्रेष्ठ है।
उन्होंने बताया  कि योग की विभिन्न विधाएँ हैं, पर योगासन और प्राणायाम आम आदमी को स्वस्थ रखने के लिए अतिआवश्यक हैं। आज नित्य प्रति परिवार, समाज और देश में आपराधिक घटनाएँ , जैसे चोरी चकारी, हत्या, आगज़नी , मारपीट, असहष्णुता जैसी घटनाओं पर योग के माध्यम से क़ाबू पाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि योग और आयुर्वेद को अपनाकर हम रोग मुक्त समाज की रचना करने के साथ, अपने देश और बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित करेंगे।