कोविड-19 के खतरे के बीच, अगले स्‍वास्‍थ्‍य जोखिम – डेंगू और मलेरिया से निपटने की तैयारी-डॉ. मुकेश संकलेचा, बाल रोग विशेषज्ञ  

Edit-Rashmi Sharma

जयपुर 25 जून 2020  – आज पूरा देश भयंकर कोरोना वायरस से लड़ रहा है। यह वायरस दुनिया भर में लाखों लोगों की जिंदगियां ले चुका है। इस महामारी ने हमारे दैनिक जीवन को बदलकर रख दिया है। इसने हमारे लिए यह जरूरी कर दिया है कि हम हमारी साफ-सफाई की आदतों में बदलाव लाएं और खुद को अधिक से अधिक साफ-सुथरा रखने पर ध्‍यान दें। जहां भारत अभी इस महामारी लड़ ही रहा है, वहीं मच्‍छरों के काटने से होने वाली बीमारियों का खतरा भी पैदा होने लगा है। आगे की राह आसान नहीं है और निस्‍संदेह यह कहा जा सकता है कि अपनी संपूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु आपको स्‍वास्‍थ्‍य की रक्षा से जुड़ी सावधानियां गंभीरता से बरतनी होंगी।

मई से लेकर सिंतबर तक के महीने में मच्‍छरों का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। नेशनल वेक्‍टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP) द्वारा प्रदत्‍त आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2020 तक पूरे भारत में मलेरिया के 29,340 मामले दर्ज हो चुके हैं। जिन राज्‍यों में मलेरिया के सबसे अधिक मामले हैं, उनमें पहले स्‍थान पर छत्‍तीसगढ़ हैं, जहां मलेरिया के 10,029 मामले दर्ज किये गये हैं, जबकि झारखंड व उत्‍तर प्रदेश क्रमश: 2,037 व 1,959 मामलों के साथ दूसरे व तीसरे नंबर पर हैं और इसके बाद महाराष्‍ट्र में इसके 1,533 मामले दर्ज हैं। यद्यपि पिछले दो दशकों में, मलेरिया के मामलों में कमी आई है, लेकिन इस वर्ष इसके मामलों की संख्‍या में स्‍पष्‍ट रूप से वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष इसी समय, मेरे पास मलेरिया के बमुश्किल दो मरीज थे, जबकि इस वर्ष मात्र एक महीने के भीतर इसके लगभग 10 मामले आ चुके हैं।

मानसून ने लगभग दस्‍तक दे दी है, ऐसे में मच्‍छरों के बढ़ने के लिए व्‍यापक रूप से अनुकूल परिस्थितियां मौजूद होने से उनकी संख्‍या बढ़ने की संभावना है। देश का ध्‍यान अभी कोविड-19 पर है, लेकिन हमें इसके चलते मच्‍छरों से होने वाली बीमारियों की संभावनाओं को नजरंदाज नहीं करना होगा। चूंकि लॉकडाउन के चलते फ्यूमिगेशन बाधित हो जाने के कारण, हमारे लिए यह जरूरी है कि हम व्‍यक्तिगत स्‍तर पर सावधानियां बरतें जिससे कि इसके मामले न बढ़ें। यह खास तौर पर महत्‍वपूर्ण है। यदि फ्यूमिगेशन फिर से शुरू भी हो जाता है, तो इससे केवल बड़े मच्‍छर ही समाप्‍त हो सकेंगे जबकि ठहरे हुए पानी में पनप रहे मच्‍छर बचे ही रह जायेंगे।

बीमारियों के एक अन्‍य संभावित झोंके से बचने के लिए, व्‍यक्तिगत रूप से कुछ सावधानियां बरतनी होंगी। सबसे पहले, आपको अपने आसपास की जगहों को देखना होगा कि कहीं पानी तो नहीं जमा हुआ है। पानी के टैंक्‍स की नियमित रूप से जांच करें, ताकि ये मच्‍छरों का प्रजनन स्‍थल न बन पायें। इस स्थिति से बचने के लिए, प्रोफेशनल ऑथरिटीज से अपने वाटर टैंक्‍स की जांच कराकर आश्‍वस्‍त हो लें कि वे साफ और अच्‍छी तरह से ढंके हुए हैं। चूंकि हम इस भीषण लॉकडाउन में फंसे हैं और अभी अपने घर की साफ-सफाई आदि में सहायता के लिए किसी को रख भी नहीं सकते, ऐसे में हो सकता है कि लोग अपने गैरेज, बालकनी और टैरेस को साफ करना भूल जायें, जबकि इन जगहों पर पानी जमा होने की संभावन होती है।

बच्‍चों को मच्‍छरों से होने वाली बीमारियों का शिकार होने का अधिक खतरा होता है। अभी जहां बड़ों की जिंदगियों को इस महामारी ने प्रभावित कर रखा है, वहीं बच्‍चों के लिए भी सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी हैं, क्‍योंकि यह बच्‍चों और बड़ों दोनों से समान रूप से अपेक्षित है। निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, हालांकि बच्‍चों का बाहर जाकर खेलना कम हो गया है, लेकिन हम उन्‍हें अधिक लंबे समय तक ऐसा करने से नहीं रोके रख सकते। ऐसे में हमारी सलाह है कि जब भी बच्‍चे खेलने के लिए बाहर जाएं, वो फुल स्‍लीव के कपड़े जरूर पहनें, ताकि उनके लिए मच्‍छरों के काटने की संभावना कम रहे। दूसरी बात यह है कि रिपेलेंट्स का उपयोग कर बच्‍चों को मच्‍छरों से बचाया जा सकता है। गुडनाइट जैसे भरोसेमंद ब्रांड्स ने बाजार में ऐसे रिपेलेंट्स उपलब्‍ध कराये हैं जिन्‍हें कपड़ों पर लगाया जा सकता है और यह त्‍वचा पर लगाने से बेहतर भी है। इन्‍हें पीठ की ओर लगाएं, जिससे कि ये त्‍वचा के सीधे संपर्क में न आये और इससे बच्‍चों द्वारा इसे मुंह में डालने का खतरा भी नहीं होगा।

संपूर्ण सुरक्षा के लिहाज से, यह सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है कि आप घर से बाहर और भीतर मच्‍छरों से सुरक्षित रहें। ऐसा नहीं है कि मच्‍छर केवल रात के समय ही आते हैं। हम सामान्‍य तौर पर रिपेलेंट्स का इस्‍तेमाल शाम को या फिर रात को सोने के समय करते हैं, जबकि मलेरिया वाले मच्‍छर रात 9 बजे से सुबह 5 बजे के बीच सक्रिय रहते हैं और डेंगू वाले मच्‍छर बिल्‍कुल सुबह-सुबह और शाम ढलने से पहले सबसे ज्‍यादा सक्रिय रहते हैं। यही कारण है कि आपके लिए पूरे दिन सुरक्षा सुनिश्चित करना महत्‍वपूर्ण है, भले ही आप घर के भीतर ही क्‍यों न हों। इसके लिए लिक्विड वेपराइजर्स, कॉइल्‍स, अगरबत्‍ती आदि जैसे मॉस्किटो रिपेलेंट्स का उपयोग किया जा सकता है। जो लोग मच्‍छरों की अगरबत्‍ती का इस्‍तेमाल करते हैं, उनके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि वो किस अगरबत्‍ती का उपयोग करें। बाजार में ऐसी तमाम अगरबत्तियां भरी पड़ी हैं जो स्‍वास्‍थ्‍य के लिए नुकसानदेह हैं और उनके कीटनाशक युक्‍त फॉर्म्‍यूलेशंस के चलते कई समस्‍याओं का खतरा होता है। इसलिए, केवल उन ब्रांडेड उत्‍पादों का ही उपयोग करें जो कानूनी रूप से स्‍वीकृत हैं, ताकि मच्‍छरों को भगाने की कोशिश में आप स्‍वयं को नुकसान न पहुंचा लें। यदि आप लिक्विड वेपराइजर्स का इस्‍तेमाल कर रहे हैं, तो ऐसे वेपराइजर्स का प्रयोग करें जो प्रभावकारी हो और कमरे के कोने-कोने से मच्‍छरों का सफाया कर दे।

यह समझना महत्‍वपूर्ण है कि जहां हम कोरोना महामारी के प्रकोप से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ धोने या मास्‍क पहनने जैसे व्‍यक्तिगत स्‍वच्‍छता उपायों पर ध्‍यान देते हैं, वैसे ही हमें अपने आसपास की जगहों के लिए भी ये उपाय अपनाने होंगे, ताकि हम मच्‍छरों से होने वाली बीमारियों से बच सकें।