क्षमा वीरस्य भूषणं ” शुरू से अंत तक क्षमा भाव धारण करना ही उत्तम क्षमा धर्म – आर्यिका गौरवमती

Edit-Dinesh Bhardwaj
जयपुर 24 अगस्त 2020 – रविवार से दिगम्बर जैन समाज के दशलक्षण पर्व प्रारम्भ हुए इस अवसर पर विश्व विख्यात दिगम्बर जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा दिगम्बर जैन मंदिर के प्रांगण में विराजमान गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ने प्रथम दिन ने ” उत्तम क्षमा धर्म ” का महत्व बताते हुए कहा की आचार्यो ने कहा है की  ” प्रतिकार करने की सामथ्र्यता होने के बावजूद भी सहन करना ही उत्तम क्षमा धर्म है। हर किसी का प्रतिकार कर उसे हरा देना या उसे नीचा दिखाना ये बड़ी बात नहीं है अपितु उसका प्रायुतर न देकर उस कड़वे घूँट को अमृत समझ कर पी जाना – सहन कर देना अथवा आत्मा विवेक को जाग्रत कर लेना यही क्षमा धर्म बतलाता है। क्षमा क्रोधी के प्रति धारण की जाती है वह क्रोधाग्नि बड़ी साम्यता से शांत की जाती है। जैसे अग्नि पांच प्रकार की होती है क्रोधाग्नि, कामाग्नि, जहराग्नि, दावाग्नि, बड़वाग्नि।
जैन समाज के दशलक्षण पर्व आज  से शुरू। मनाया उत्तम क्षमा धर्म, कल मनाया जाएगा उत्तम मार्दव धर्म
क्रोधाग्नि बाहर और भीतर दोनों और से जलाने वाली है इसे बुझाने के लिए आत्मज्ञान, स्थान परिवर्तन, बूर निमित से हटना, मौन इत्यादि अवलम्बनही सहकारी होता है। दीपायन मुनि तक क्रोध के वशीभूत होकर पूर्ण द्धारिका नगरी तक जला सकते है और अपने आप को भी भस्म कर लिया इससे बढ़कर और दृष्टान्त क्या हो सकता है अतः क्रोध को जीतकर क्षमा भाव धारण करना चाहिए।  ” क्षमा का भाव जीवन के प्रथम दिन से शुरू होकर जीवन के अंत तक रहना चाहिए यही उत्तम क्षमा धर्म है और यही इस सृष्टि का सबसे बड़ा धर्म भी है। जिसने क्षमा करना सीख उसका पूरा जीवन भावों में धारण हो जाता है।
*दशलक्षण पर्व में आज (सोमवार) दूसरा दिन, मनाया जाएगा उत्तम मार्दव धर्म*
प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया की रविवार से जैन धर्म के सबसे पवित्र दशलक्षण पर्व का शुभारंभ जयपुर ही नही बल्कि पुरे विश्व में हुआ। दशलक्षण पर्व दिगम्बर जैन परंपराओं में श्रद्धा-भक्ति, त्याग, तप और साधना के साथ मनाया जाता है। इन दस दिनों में समाज के प्रत्येक सदस्य और परिवार श्रावक धर्म के कर्तव्यों का पालन करते है और त्याग, तप, साधना और आराधना की भावना को धारण करते हुए क्रोध, मोह, माया का त्याग कर दसधर्म की पूजन आराधना करते है। रविवार को जैन श्रद्धालुओं ने घरों में रुककर भावों के साथ दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना की और सोमवार को भी दश धर्म के दूसरे दिन ” उत्तम मार्दव धर्म ” की आराधना करेगे।