जिम्मेदार मौन…आवारा पशुओं से हादसे ऑन

विष्णु कुमार शर्मा, बस्सी

सड़कों पर आवारा पशुओं की गिनती लगातार बढ़ती जा रही है। झुंड के रूप में जानवर न केवल शहर से बाहर के रास्तों पर बैठे मिलते हैं, बल्कि ये शहर के अंदर भी आराम से घूमते हुए देखे जा सकते हैं। इस वजह से लोगों के काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बड़े वाहनों की चपेट में आने से पशु भी चोटिल हो जाते हैं, परंतु नगर निगम या अन्य किसी संबंधित जिम्मेदार की ओर से कभी भी इस विषय पर गंभीरता नहीं दिखाई जाती है। बहुत बार इन जानवरों के आपस में लड़ने के कारण भी राहगीरों के सामने जान जोखिम में डालने तक की समस्या पैदा हो जाती है।

 

नेशनल हाईवे 21 पर गुरुवार को आवारा पशुओं को बचाने के चक्कर में पलटा ट्रक।

गुरुवार सुबह भी कानोता कस्बे के ग्राम खोखावाला में आगरा रोड पर एक आवारा सांड को बचाने के चक्कर में तीन ट्रक एवं एक जीप पलट गए। गनीमत रही कि इस हादसे में कोई भी हताहत नहीं हुआ और एक बड़ा हादसा होने से टल गया। हालांकि इस वजह से काफी देर तक जाम की स्थिति बनी रही, बाद में पुलिस ने मौके पर आकर जाम खुलवाया।

हो रहे हादसे, नहीं जाग रहा प्रशासन

आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर बार-बार प्रशासन को सूचित किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन कोई भी करवाई नहीं कर रहा है। ऐसे में अगर जिम्मेदार ही अपनी जिम्मेदारी नहीं संभालेगा तो आगे भी ऐसे ही हादसे होते रहेंगे और लोगों को अपनी जान को संक्ट में डालकर सड़कों पर चलना होगा।

आवारा पशुओं के कारण पलटी गाडियों से हाईवे पर बिखरा सामान।

पहले मौतें तक हो चुकी हैं

हर साल सैकड़ों लोगों को अपनी जान आवारा पशुओं की वजह से गंवानी पड़ती है। नवम्बर, 2017 में जयपुर घूमने आए विदेशी युवक की एक आवारा सांड के सींग मारने से मौत हो गई थी। मृतक की पहचान अर्जेंटीना निवासी पर्यटक जॉन पाबलो लैंपी के तौर पर हुई थी। जयपुर के माणक चौक क्षेत्र में त्रिपोलिया गेट के पास एक सांड ने उसे सींग मारकर घायल कर दिया था।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने इस सिलसिले में सितम्बर, 2018 में ही आवारा पशुओं को शहरी मार्गों एवं अंतरराष्ट्रीय राजमार्गों से हटाने का आदेश दे दिया था, लेकिन उसके बाद से अब तक जिम्मेदार प्रशासन हरकत में नहीं आया और इसी वजह से आज यह हादसा हुआ है।

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