राष्ट्रीय, 7 जनवरी 2026: टीपी सोलर लिमिटेड ने अप्रैल 2025 से दिसंबर 2025 की 9 महीने की अवधि में मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। टीपी सोलर लिमिटेड, टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (टाटा पावर) की सहायक कंपनी ‘टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड’ के पूर्ण स्वामित्व वाली सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकाई है।
इस अवधि के दौरान, कंपनी ने 2.8 गीगावाट ‘डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट’ (DCR) सोलर सेल और 2.9 गीगावाट सोलर मॉड्यूल का निर्माण किया। कुल 2.9 गीगावाट मॉड्यूल्स में से 2.4 गीगावाट DCR मॉड्यूल थे और बाकी बचे 0.5 गीगावाट ALMM मॉड्यूल (Approved List of Models and Manufacturers) थे।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में, टीपी सोलर ने 940 मेगावाट सेल्स का उत्पादन किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 196 मेगावाट के मुकाबले लगभग 5 गुना अधिक है। मॉड्यूल उत्पादन भी पिछले साल के 927 मेगावाट की तुलना में 990 मेगावाट रहा, जो करीब 7% की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है। ये परिणाम कंपनी की उत्पादन क्षमता में निरंतर विस्तार और बेहतर कार्यकुशलता को रेखांकित करते हैं।
टीपी सोलर तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में भारत की सबसे बड़ी सोलर सेल और मॉड्यूल बनाने वाली फैक्ट्री चलाती है, जिसकी क्षमता 4.3 गीगावाट है। यह एक ही जगह पर स्थित देश की सबसे आधुनिक फैक्ट्रियों में से एक है।
इस केंद्र की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ के कर्मचारियों में लगभग 80% महिलाएँ हैं, जो समावेशी विकास के प्रति कंपनी की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
टाटा पावर ने अपनी सहायक कंपनी टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड (TPREL) के माध्यम से के जरिए इस प्लांट को बनाने में करीब ₹4,300 करोड़ का निवेश किया है। यह निवेश सोलर वैल्यू चेन के स्वदेशीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है और सोलर सेल व मॉड्यूल के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने के कंपनी के रणनीतिक लक्ष्य को और मजबूत करता है।
यह प्लांट आधुनिक TOPCon और Mono PERC तकनीकों से लैस है। यहाँ ALMM-प्रमाणित मॉड्यूल के साथ-साथ, इसी प्लांट में बने ‘मेड इन इंडिया’ सेल का उपयोग करके DCR मॉड्यूल भी बनाए जाते हैं।
यह प्लांट भारत में ही सामान बनाकर देश के नेट-जीरो लक्ष्य (प्रदूषण मुक्त भविष्य) को पूरा करने में मदद करने के कंपनी के वादे को निभाता है।
पत्रिका जगत Positive Journalism