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महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर का प्रथम दीक्षांत समारोह

जयपुर 28 जून 2019 राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह ने युवाओं को जीवन में उच्च लक्ष्य तय करने का आव्हान किया है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ युवा अपने अंदर कत्र्तव्यबोध जागृत करें। जीवन में सही दिशा तय करने के लिए ज्ञान का सार्थक उपयोग करना आवश्यक है।
राज्यपाल श्री सिंह शुक्रवार को भरतपुर के यू.आई.टी. ऑडिटोरियम में आयोजित महाराजा सूरजमल बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री सिंह ने समारोह में 67 छात्र-छात्राओं को पदक व प्रमाण पत्र दिये।
कुलाधिपति श्री सिंह ने कहा कि परम्परागत विषयों के साथ ही रोजगार उन्मुखी पाठ्यक्रमों के संचालन पर भी विश्वविद्यालयों को ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बृज विश्वविद्यालय के कुलपति को ऑपरेशनल रिसर्च पर स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिये। ऑपरेशनल रिसर्च एक ऎसी विधा है, जो युवाओं में मैनेजमेंट स्किल को सिखाता है। लीडरशिप की जटिल समस्याओं को हल करने की तकनीक को इस पाठ्यक्रम से सीखा जा सकता है।

राज्यपाल श्री सिंह ने कहा कि अनिश्चितता और विभिन्न लक्ष्यों के मध्य टकराव की स्थिति में भी ऑपरेशनल रिसर्च के सूत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। किसी संस्थान के प्रबंधक को अपना कार्य प्रभावी ढंग से करने में ऑपरेशनल रिसर्च की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती हैै। ऑपरेशनल रिसर्च की तकनीक से अपने अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण कायम रख कर कार्य को शीघ्र और अच्छे तरीके से सम्पन्न कराया जा सकता है। ऑपरेशनल रिसर्च के विद्यार्थी औद्यौगिक एवं मैनेजमेंट को अपना कार्यक्षेत्र बना सकते हैं। श्री सिंह ने कहा कि राजस्थान में ऑपरेशनल रिसर्च विषय में पाठ्यक्रम कराने वाला यह एकमात्र विश्वविद्यालय होगा। यहाँ गृह विज्ञान, ड्रॉइग, पेन्टिंग और विधि में कोर्स पहले से ही संचालित हैं। यह सभी रोजगारपरक कोर्स हैं।
राज्यपाल श्री कल्याण सिंह ने शिक्षकों का आव्हान किया कि वे परस्पर प्रेम, स्नेह एवं सहयोग से कार्यशक्ति का भरपूर उपयोग करें। अन्वेषण एवं शोध द्वारा विद्यार्थियों को नई दृष्टि व सही दिशा प्रदान करें। छात्राें में आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक क्षमता को विकसित करें। अकादमिक गुणवत्ता को सामाजिक उपयोगिता के दृष्टिकोण से प्रभावी बनायें। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की क्षमता नई पीढ़ी में विकसित करें। पाठ्यक्रमों को समय के अनुकूल उपयोगी और अद्यतन बनायें।
कुलाधिपति श्री सिंह ने कहा कि शिक्षा की सार्थकता तब ही होगी, जब इसका लाभ देश, समाज व परिवार को प्राप्त होगा। युवा वर्ग को उन्नति और विकास के लिए जो अनुकूल स्थितियाँ प्रदान की गई हैं, यह उन पर देश और समाज का ऋण है। राष्ट्र के नवनिर्माण में युवा पीढ़ी योगदान देकर इस ऋण से मुक्त होने का प्रयास कर सकती है।
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री एस0 रविन्द्र भट ने दीक्षान्त भाषण में कहा कि आज विद्यार्थी नये जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। यह जीवन कॉलेज के जीवन से बहुत ज्यादा जटिल और चुनौतीपूर्ण है। यहॉं हर रोज परीक्षा होगी, हर पल चौकन्ना रहना होगा, रोज मेहनत करनी होगी लेकिन चुनौतियों से घबरायें नहीं, अपने लक्ष्य तय करें तथा कठिन मेहनत और योजनाबद्ध रणनीति से इन्हें हासिल करें। लक्ष्य दीर्घकालिक, मध्यकालिक या अल्पकालिक हो सकते हैं। कितनी भी वितरीत परिस्थिति हो, दूसरों की मदद करना न छोडें। दूसरों की मदद करना स्वयं की मदद करने का सबसे बडा उपाय है।
उन्होंने बेटियों के शिक्षा समेत प्रत्येक मोर्चे पर आगे रहने पर प्रसन्नता व्यक्त की। दीक्षान्त समारोह में 42 छात्राओं और 15 छात्रों को पदक प्रदान किये गये। इससे स्पष्ट है कि बेटियॉं हर क्षेत्र में आगे बढ रही है। लडके भी उनका अनुकरण कर अपनी मेहनत और काबलियत से देश और समाज को आगे बढाये।
समारोह में कुलपति प्रो0 अश्वनी कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय ने इतने कम समय में ही बडी प्रतिष्ठा प्राप्त की है तो हम सभी के लिये गौरव का विषय है। इन्डिया टुडे के उच्च शिक्षा विशेषांक में इसे उत्तरी भारत के विश्वविद्यालयों में छठी तथा देशभर में 29वीं रैंकिंग मिली है। जल्द ही एलुमनि एसोशियेशन स्थापित करेंगे ताकि यहॉं से निकले विद्यार्थी इस विश्वविद्यालय और इसके विद्यार्थियों के विकास में अपना योगदान दे सके।
जिला मुख्यालय स्थित यूआईटी ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षान्त समारोह में कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह ने वर्ष 2017 के 8720 और वर्ष 2018 के 6674 स्नातकोत्तर एवं वर्ष 2018 के 11144 स्नातक उत्तीर्ण विद्यार्थियों को डिग्री जारी की।
समारोह में सम्भागीय आयुक्त चन्द्रशेखर मूथा, जिला कलक्टर डॉ0 आरूषि अजेय मलिक, पुलिस अधीक्षक हैदर अली जैदी, न्यायिक सेवा के अधिकारी, विवि के रजिस्ट्रार डॉ0 राजेश गोयल भी उपस्थित रहे।

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