वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को एमपीयूऐटी मे पुष्पाजंली का आयोजन

Editor-Manish Mathur

जयपुर 19 जनवरी 2021  – महाराणा प्रताप कृषि एवँ प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, उदयपुर में वीर शिरोमणि प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की पुण्यतिथि पर दिनांक 19  जनवरी, 2021 को पुष्पाजंली कार्यक्रम आयोजित किया। राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर में स्थित महाराणा प्रताप की अश्वारूढ प्रतिमा के समक्ष विश्वविद्यालय वित्तनियंत्रक, अधिष्ठाता, आरसीए, अधिष्ठाता, सीटीएई, अधिष्ठाता, सीसीएएस, निदेशक, अनुसंधान, निदेशक प्रसार शिक्षा, निदेशक, आयोजना एवं परिवेक्षण, वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महाराणा प्रताप को पुष्पाजंली अर्पित करते हुए स्मरण किया।

इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिकारी डॉ. सुधार जैन ने  महाराणा प्रताप को प्रातः स्मरणीय व स्वाधीनता का रक्षक बतातें हुए कहा कि उनका जीवन संधर्ष पूर्ण रहा। उन्होने कृषि विकास के लिए भी अभूतपूर्व योगदान दिया था । महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1940 को हुआ। 1572 ई. में मेवाड रियासत के 13 वें महाराणा के रूप में राजगद्वी संभाली, महाराणा उदय सिंह, महाराणी जयवन्ता बाई के इस ज्येष्ठ पुत्र ने विश्वपटल पर मेंवाड की अपनी एक अलग लौ लगाई, जो आज तक दैदिप्यमान हैं। महाराणा प्रताप को शौर्य पराक्रम और त्याग की प्रतिमुर्ती के रूप में जाना जाता हैं।

प्रताप शोध पीठ के सदस्य प्रो. एस.एस. सिसोदिया ने भी महाराणा प्रताप की भावनाओ के सदंर्भ को बताते हुए कहा कि महाराणा प्रताप में मानवीयता कूट-कूट कर भरी थी। उन्होने सम्प्रदाय एवं ऊँच नीच को खत्म किया उनकी सेना में सभी वर्ग के लोगो का समान सम्मान था इसीलिए उन्है जननायक भी कहा जाता हैं। सिसोदिया वंश की परम्परा के वे पूर्ण निर्वाहक रहें। वही निदेशक अनुसंधान डॉ. शान्ति कुमार शर्मा ने अपने अध्ययन काल में गुरू द्वारा महाराणा प्रताप के जीवन और मेवाड से  9 व 10 के अंको के जुडाव का महत्व बताया।