कोविड-19 की स्थिति में आजीविका और रोजगार की योजना -गोदरेज इंडस्‍ट्रीज और एसोसिएट कंपनीज की सीएसआर हेड, गायत्री दिवेचा

Editor-Ravi Mudgal

 जयपुर 16 फरवरी 2021  – गोदरेज इंडस्‍ट्रीज और एसोसिएट कंपनीज की सीएसआर हेड, गायत्री दिवेचा ने आगामी समय में रोजगारपरक-योग्यता के स्‍वरूप और आजीविका एवं रोजगार को मजबूत बनाने के तरीकों  की रूपरेखा तैयार की

कोविड-19 महामारी इक्कीसवीं सदी में अब तक की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती रही है। इसने दुनिया के लाखों लोगों के स्वास्थ्य, जीवन और आजीविका को प्रभावित किया है। हालांकि जनस्वास्थ्य की चिंता सबसे प्रमुख है, लेकिन लोगों की जिंदगियों व आजीविका को पटरी पर लाना भी बड़ी प्राथमिकता है। विश्‍व बैंक के अनुसार, बीते 20 वर्षों में पहली बार वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी और शक्तियों के टकराव व जलवायु परिवर्तन के चलते वैश्विक गरीबी के चरम पर पहुंचने का अनुमान है।

महामारी को देखते हुए लगाये गये लॉकडाउन ने असंख्‍य लोगों और खासकर दिहाड़ी मजदूरों, प्रवासी मजदूरों आदि की जिंदगी को बेहद प्रभावित किया। हालांकि लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील और सरकार द्वारा घोषित राहत उपायों ने अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में मदद की है, लेकिन व्यवसायों, विशेष रूप से छोटे व्‍यवसायों जैसे कि पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और ब्‍यूटी एवं वेलनेस की रिकवरी बहुत धीमी रही है।

महामारी के शुरू होने के बाद के नौ महीनों में, जीवन एवं आजीविका के पुनर्निर्माण एवं लचीलेपन में निवेश जैसी नीतिगत बातें और कई प्रमुख सबक सीखने को मिले हैं।

सुरक्षा कवच का विस्‍तार

कोविड-19 ने विशेष रूप से हाशिए पर और अल्पविकसित समुदायों की सामाजिक सुरक्षा और रक्षा कवच की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है। ये आजीविका के विकल्प नहीं हो सकते हैं, हालांकि, ये आजीविका संवर्द्धन के पूरक प्रयासों के लिए एक आधार प्रदान करते हैं, और ये लोगों को संकट, आय में उतार-चढ़ाव और आर्थिक झटकों से निपटने में सहायक हो सकते हैं। केंद्र और राज्य, दोनों ही स्‍तरों पर सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतिम व्यक्ति तक को सुरक्षा प्रदान करने संसाधन और शासनादेश इनके पास हैं।

उदाहरण के लिए, निर्माण कल्याण बोर्ड (बोर्ड ऑफ कंस्‍ट्रक्‍शन वेलफेयर), निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों को जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, घर बनाने के लिए भत्ते आदि प्रदान करता है। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण ये योजनाएँ अक्सर अपने लक्षित लाभार्थियों द्वारा अप्रयुक्‍त रह जाती हैं। कल्याणकारी सरकारी योजनाओं को समुदायों तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। निजी क्षेत्र की कॉरपोरेट फिलैंथ्रॉपी (परोपकार) के साथ-साथ उनके विस्तारित मूल्य श्रृंखला और पारिस्थितिक तंत्र के चलते इसमें उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। जेपी मॉर्गन और एडलगिव जैसे कई कॉरपोरेट्स ने प्रवासी परिवारों की अंतर्निहित लचीलापन को दूर करने के लिए पहले ही सीएसआर के प्रयासों को आगे बढ़ाया है। फोर्ब्स मार्शल, क्यूमिन्‍स, थर्मैक्स और गोदरेज जैसी कंपनियों ने दसरा’ज सोशल कंपैक्‍ट के तहत अपने इकोसिस्‍टम्‍स के भीतर श्रमिक कल्याण का आकलन किया और कुछ ऐसी सर्वोत्तम पद्धतियां शुरू की हैं जिन्‍हें दूसरी कंपनियां या संगठन अपना सकते हैं। यह लचीला पन लचीलापन और सामाजिक सुरक्षा कवच की जरूरतों को पूरा करने, और सीखी गयी बातों का लाभ उठाते हुए सर्वोत्तम पद्धतियों को अपनाने की सोच पर आधारित है।

The role of civil society is equally important, given they are closest to communities and are custodians of their trust. Non-profit Jan Sahas has set up the Migrants Resilience Collaborative, a grassroots-led multi-stakeholder collaborative focused on ensuring safety, security, and mobility for vulnerable migrant families, in 11 key states across India.

इसमें नागरिक समाज की भूमिका भी समान रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे समुदायों के सबसे करीब हैं और उन पर उनका भरोसा कायम है। गैर-लाभकारी संस्था, जन साहस ने माइग्रेंट्स रेसिलिएंस कोलैबॅरेटिव स्‍थापित किया है, जो जमीनी स्‍तर पर विभिन्‍न सहभागियों के सहयोग से शुरू किया गया प्रयास है, जो भारत के 11 प्रमुख राज्‍यों में कमजोर प्रवासी परिवारों की सुरक्षा, संरक्षा और उनके आवागमन को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

 पुनर्कौशल की आवश्‍यकता  

हालांकि सुरक्षा कवच का विस्‍तार महत्वपूर्ण है, लेकिन विशेष तौर पर कोविड काल के बाद के बदलाव के दौर में रोजगार-योग्‍यता सुनिश्चित करने हेतु कौशल विकास तात्‍कालिक आवश्‍यकता बन चुका है। जिम्‍मेदार कॉर्पोरेट्स और अन्‍य संगठनों ने महमारी बाद के काल में प्रशिक्षण प्रदान करने और उपयोगी क्षमताओं के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया है।

ऐसी ही एक पहल है सैलॅन-I, जो गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (GCPL) द्वारा महिलाओं के प्रशिक्षण हेतु चलाया जा रहा कार्यक्रम है। यह पहल के जरिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वो कौशल हासिल कर सकें जिससे वो नौकरी लायक बन सकें या फिर ‘ब्‍यूटीप्रिन्‍योर्स’ के रूप में ब्‍यूटी सेक्‍टर में अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें। इस पहल के तहत, सैलॅन ओनर्स और महिला उद्यमियों को अपने व्यवसाय में तेजी लाने के लिए सामग्रियां और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। गुजरात में, जीसीपीएल ने बार्बर्स को के कौशलोन्‍नयन हेतु पाइलट प्रोजेक्‍ट भी शुरू किया। जहां सैलून के बंद हो गये और आमदनी का जरिया समाप्‍त हो गया था, ऐसे में ब्‍यूटीप्रिन्‍योर्स के साथ मिलकर काम करना आवश्‍यक हो गया, ताकि विकल्‍प की तलाश की जा सके, जैसे कि आय के छोटे स्रोतों को चिह्नित किया जा सके। उनके कौशलों को समझने का प्रयास किया गया और उन्‍हें मास्क, होम-मेड ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स तैयार करने हेतु ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिससे कि वो इन उत्‍पादों को अपने पुराने ग्राहकों आदि को बेच सकें। सैलूनों के फिर से खुलने के साथ, सैलॅन-i प्रशिक्षण में सुरक्षा और स्‍वच्‍छता के व्‍यापक मॉड्यूल्‍स भी शामिल किये गये, और ब्‍यूटीप्रिन्‍योर्स को हाइजिन स्‍टार्टर किट्स भी भेजे गये।

डिजिटल पहुंच एवं योग्‍यता को गहनता प्रदान करना

महामारी ने फिजिकल से डिजिटल में रूपांतरण को गति दी है। ऐसे में, प्रासंगिक बने रहने के लिए डिजिटल क्षमताओं को हासिल करना सभी पेशेवरों और व्यवसायों के लिए अनिवार्य हो गया है। डिजिटल लर्निंग और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। हालाँकि, डिजिटल पहुंच को लेकर गहरा विभाजन और असमानताएं भी पायी गयी हैं। प्रथम की नवीनतम एएसईआर रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक स्कूलों में केवल 8.1% बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर पाने में सक्षम थे, जो सर्वोत्‍तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए उचित, विश्वसनीय और सुरक्षित डिजिटल पहुंच और क्षमता निर्माण सुनिश्चित करने की अनिवार्यता को प्रदर्शित करता है। हार्डवेयर निर्माताओं ने इस अंतर को भरने के लिए कदम उठाये हैं। उदाहरण के लिए, लेनोवो डिजिटल लर्निंग के लिए युवाओं को रियायती कीमतों में टैबलेट उपलब्‍ध करा रहा है। यदि शिक्षा को रोजगार के निर्माण का आधार माना जाता है, तो डिजिटल माध्यम की सर्वसुलभता, समावेशी कक्षाओं के निर्माण एवं छात्रों को पढ़ाई के बेहतर परिणाम हासिल करने में शिक्षा जाल के विस्तार में मदद कर सकती है।

सामाजिक हित के लिए भागीदारी

यह महामारी, नागरिक समाज, सरकारों, गैर-लाभकारी संस्थाओं, कॉरपोरेट्स, आदि सहित सभी के लिए एक स्पष्ट आह्वान है कि वो साथ मिलकर काम करें। हमने लॉकडाउन के दौरान बहुत कम समय के भीतर इसके उदाहरण देखे हैं और उस गति को बनाए रखने के लिए प्रयास करना चाहिए। व्यवसाय अपने मूल्य श्रृंखलाओं में क्षमताओं और योग्‍यताओं के निर्माण में मदद करके इस में योगदान कर सकते हैं।और भारत और दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण हैं। ब्रिटिश रिटेलर, मार्क्स एंड स्पेंसर ने टिकाऊ कपास पद्धतियों को समर्थन करने के लिए बेटर कॉटन इनिशियेटिव (बीसीआई) और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के साथ भागीदारी की है। मैरिको, केरल और तमिलनाडु में नारियल किसानों को उपज बढ़ाने और आय बढ़ाने में मदद कर रहा है।

महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित सह्याद्री फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, ग्रामीण स्तर के संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों से जुड़कर न केवल छोटे किसानों से सीधे कृषि उपज (जैसे टमाटर और अंगूर) खरीदती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण इनपुट्स, ज्ञान और तकनीकी सहायता भी प्रदान करता है, जिससे छोटे किसानों को काफी लाभ है। जहां कोविड -19, एक बेहतर नॉर्मल की शीघ्र आवश्‍यकता के वेक-अप कॉल है, वहीं इसे स्थिरता और साझा समृद्धि की दृष्टि से विचार करने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन और लगातार सामाजिक असमानताएं व अधिक गंभीर प्रभाव के चलते संकट गहरा सकता है, और इसलिए, हमारा हित इसी में है कि हम समय रहते समझ और संभल जायें।

 

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