राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय एवं महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर में एम.ओ.यू.

Edit-Rashmi Sharma

जयपुर 22 जून 2020 – कॉविड-19 महामारी से उच्च, तकनीकि व कौशल शिक्षा में आये गतिरोध को कम करने तथा विद्यार्थियों को शिक्षा से निरंतर जोड़कर उनके शैक्षिक व कौशल शिक्षा के उन्नयन को बनाये रखने के लिए राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय एवं महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के मध्य एम.ओ.यू. किया गया।

राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 ललित के. पंवार तथा महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कार्यवाहक कुलपति प्रो. पी. सी. त्रिवेदी ने सोमवार को राजीव गाँधी विद्या भवन स्थित विश्वविद्यालय परिसर में हस्ताक्षर कर एम.ओ.यू. एक दूसरे को सौपें।

राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ0 ललित के. पंवार ने बताया कि राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने प्रदेश के सभी राज्य वित-पोषित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से कहा है कि वे राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के साथ एम.ओ.यू. कर इस विश्वविद्यालय के रोजागारान्मुखी कोर्सेस को अन्य विश्वविद्यालयों में कॉन्करन्ट कोर्स के रूप में चलाकर विद्यार्थियों को तत्काल रोजगार से जोड़ने का प्रयास करें। कौशल विश्वविद्यालय भी राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों की शैक्षिक उपयोगिताओं का पूरा लाभ उठाकर कौशल शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रमों को इस तरह से तैयार करें कि विद्यार्थी रोजगार से जुड़कर अपने पांवों पर खड़ा हो सके। कोरोना महामारी के इस समय में कौशल शिक्षा के कोर्सेस सबसे उपयोगी साबित होंगे।

डॉ. पंवार ने बताया कि राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के साथ राजस्थान विश्वविद्यालय, जोधपुर विश्वविद्यालय, स्वामी केशवानन्द कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर, गोविंद गुरू आदिवासी विश्वविद्यालय बांसवाड़ा सहित राज्य के लगभग एक दर्जन विश्वविद्यालयों से एम.ओ.यू. किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि जोधपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी. सी. त्रिवेदी के पास महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार है।

इस मौके पर राजस्थान राज्य आई.एल.डी. कौशल विश्वविद्यालय के निदेशक, कौशल शिक्षा प्रो. अशोक के. नगावत, कुलसचिव श्री देवेन्द्र कुमार शर्मा, वित्तीय सलाहकार श्री उम्मेद सिंह, परीक्षा नियंत्रक श्री पी. एम. त्रिपाठी तथा निदेशक संपदा श्री वी. के माथुर मौजूद थे।